बिलस्य वाणी न कदापि में श्रुता Question Answer Sanskrit Chapter 2 Class 8 संस्कृत Ruchira

Published On: April 18, 2026
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बिलस्य वाणी न कदापि में श्रुता

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अभ्यासः 


प्रश्नः 2. एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए)

(क) सिंहस्य नाम किम्? – शेर का नाम क्या है?

उत्तर: खरनखरः (खरनखर नाम का शेर)

(ख) गुहायाः स्वामी कः आसीत्? – गुफा का स्वामी कौन था?

उत्तर: दधिपुच्छः (दधिपुच्छ नाम का भालू)

(ग) सिंहः कस्मिन् समये गुहायाः समीपे आगतः? – शेर किस समय गुफा के पास आया?

उत्तर: सूर्यास्तसमये (सूर्यास्त के समय)

(घ) हस्तपादादिकाः क्रियाः केषां न प्रवर्तन्ते? – हाथ-पैर की क्रियाएं किसके द्वारा नहीं की जाती हैं?

उत्तर: भयसन्त्रस्तमनसाम् (भय से व्याकुल मन वाले व्यक्ति के द्वारा)

(ङ) गुहा केन प्रतिध्वनिता? – गुफा किस चीज से गूँज जाती है?

उत्तर: उच्चगर्जनेन (उच्च स्वर में गर्जना करने से)


प्रश्नः 3. पूर्णवाक्येन उत्तरत-

(क) खरनखरः कुत्र प्रतिवसति स्म? (खरनखर कहाँ निवास करता था?)

उत्तर: खरनखरः कस्मिंश्चित् वने प्रतिवसति स्म। (खरनखर किसी वन में निवास करता था।)

(ख) महतीं गुहां दृष्ट्वा सिंहः किम् अचिन्तयत्? (बड़ी गुफा देखकर सिंह ने क्या सोचा?)

उत्तर: महतीं गुहां दृष्ट्वा सिंहः अचिन्तयत्-‘नूनं एतस्यां गुहायां रात्रौ कोऽपि जीवः आगच्छति। अतः अत्रैव निगूढो भूत्वा तिष्ठामि।’

(बड़ी गुफा देखकर सिंह ने सोचा, “निश्चित ही इस गुफा में रात के समय कोई जीव आता होगा। इसलिए मैं यहीं छिपा रहूंगा।”)

(ग) शृगालः किम् अचिन्तयत्? (गीदड़ ने क्या सोचा?)

उत्तर: शृगालः अचिन्तयत्-‘अहो विनष्टोऽस्मि। नूनम् अस्मिन् बिले सिंहः अस्ति इति तर्कयामि। तत् किं करवाणि?’

(गीदड़ ने सोचा, “अरे, मैं तो नष्ट हो गया। निश्चित ही इस बिल में सिंह है। अब मुझे क्या करना चाहिए?”)

(घ) शृगालः कुत्र पलायितः? (गीदड़ कहाँ भाग गया?)

उत्तर: शृगालः दूरं पलायितः।  (गीदड़ दूर भाग गया।)

(ङ) गुहासमीपमागत्य शृगालः किं पश्यति? (गुफा के पास जाकर गीदड़ ने क्या देखा?)

उत्तर: गुहासमीपमागत्य शृगालः पश्यति यत् सिंहपदपद्धतिः गुहायां प्रविष्टा दृश्यते, न बहिरागता।

(गुफा के पास जाकर गीदड़ ने देखा कि सिंह के पदचिह्न गुफा में देखे जाते हैं, बाहर नहीं।)

(च) कः शोभते? (कौन सुंदर होता है?)

उत्तर: यः अनागतं कुरुते, सः शोभते| (जो भविष्य के लिए सोचता है, वही सुंदर होता है।)


प्रश्नः 4. रेखांकितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत

उत्तरम्:

(क) क्षुधातः सिंह कुत्रापि आहारं न प्राप्तवान्।
(भूख के कारण सिंह कहीं भी भोजन नहीं प्राप्त कर सका।)

उत्तर: कीदृशः सिंह कुत्रापि आहारं न प्राप्तवान्?

(कैसा सिंह और कुत्ता भोजन नहीं प्राप्त कर सका।?)

(ख) दधिपुच्छः नाम शृगालः गुहायाः स्वामी आसीत्।
(दधिपुच्छ नाम का शृगाल गुफा का स्वामी था।)

उत्तर: किम् नाम शृगालः गुहायाः स्वामी आसीत्?

गीदड़ का नाम क्या था जो गुफा का स्वामी था?

(ग) एषा गुहा स्वामिनः सदा आह्वानं करोति।
(यह गुफा अपने स्वामी को सदा आह्वान करती है।)

उत्तर: एषा गुहा कस्य सदा आह्वानं करोति?

(यह गुफा किसको सदा आह्वान करती है?)

(घ) भयसन्त्रस्तमनसां हस्तपादादिकाः क्रियाः न प्रवर्तन्ते।
(भय से व्याकुल मन वाले व्यक्ति के हाथ-पैर की क्रियाएं नहीं होती हैं।)

उत्तर: भयसन्त्रस्तमनसां कीदृश्यः/ काः क्रियाः न प्रवर्तन्ते?

(भय से व्याकुल मन वाले व्यक्ति के कौन से क्रियाएं नहीं होती हैं?)

(ङ) आह्वानेन शृगालः बिले प्रविश्य सिंहस्य भोज्यं भविष्यति।
आह्वान से शृगाल बिल में प्रवेश करके सिंह का आहार बन जाएगा।

उत्तर: आह्वानेन शृगालः कस्मिन् प्रविश्य सिंहस्य भोज्यं भविष्यति?

आह्वान से शृगाल किस में प्रवेश करके सिंह का आहार बन जाएगा?


प्रश्नः 5. घटनाक्रमानुसारं वाक्यानि लिखत-(वाक्यों को घटना के क्रम अनुसार लिखिए-)

उत्तरम्:

(क) परिभ्रम सिंहः क्षुधार्ता जातः।

भटकते हुए सिंह को भूख लग गई।

(ख) सिंहः एकां महतीं गुहाम् अपश्यत्।

सिंह ने एक बड़ी गुफा देखी।

(ग) गुहायाः स्वामी दधिपुच्छः नाम शृगालः समागच्छत्।

गुफा के स्वामी दधिपुच्छ नामक गीदड़ ने आया।

(घ) गुहायां कोऽपि अस्ति इति शृगालस्य विचारः।

गीदड़ का सोचना था कि गुफा में कोई न कोई है।

(ङ) दूरस्थः शृगालः रवं कर्तुमारब्धः।

दूर से गीदड़ ने शोर मचाना शुरू किया।

(च) सिंहः शृगालस्य आह्वानमकरोत्।

सिंह ने गीदड़ को बुलाया।

(छ) दूरं पलायमानः शृगालः श्लोकमपठत्।

दूर भागते हुए गीदड़ ने एक श्लोक पढ़ा।


प्रश्नः 6.यथानिर्देशमुत्तरत-(निर्देशानुसार उत्तर दीजिए)

उत्तरम्:

(क) ‘एकां महतीं गुहां दृष्ट्वा सः अचिन्तयत्’ अस्मिन् वाक्ये कति विशेषणपदानि, संख्यया सह पदानि अपि लिखत?

(‘एकां महतीं गुहां दृष्ट्वा सः अचिन्तयत्’ इस वाक्य में कितने विशेषणपद हैं, और संख्याओं के साथ पद भी लिखें।)

उत्तर: 1. एकाम्, 2. महतीम्।

(ख) तदहम् अस्य आह्वानं करोमि- अत्र ‘अहम्’ इति पदं कस्मै प्रयुक्तम्?

( ‘तदहम् अस्य आह्वानं करोमि’ में ‘अहम्’ शब्द किसके लिए प्रयोग किया गया है?)

उत्तर: ‘तदहम् अस्य आहवानं करोमि’–अत्र ‘अहम्’ इति पदं खरनखराय सिंहाय प्रयुक्तम्।

(ग) ‘यदि त्वं मां न आह्वयसि’ अस्मिन् वाक्ये कर्तृपदं किम्?

(‘यदि त्वं मां न आह्वयसि’ इस वाक्य में कर्ता पद कौन सा है?)

उत्तर: “यदि त्वं मां न आह्वयसि’, अस्मिन् वाक्ये कर्तृपदं त्वम् अस्ति।

(घ) “सिंहपदपद्धतिः गुहायां प्रविष्टा दृश्यते’ अस्मिन् वाक्ये क्रियापदं किम्?

(“सिंहपदपद्धतिः गुहायां प्रविष्टा दृश्यते” इस वाक्य में क्रियापद कौन सा है?)

उत्तर: ‘सिंहपदपद्धतिः गुहायां प्रविष्टा दृश्यते’ अस्मिन् वाक्ये क्रियापदं ‘दृश्यते’ अस्ति।

(ङ) वनेऽत्र संस्थस्य समागता जरा’ अस्मिन् वाक्ये अव्ययपदं किम्?

(‘वनेऽत्र संस्थस्य समागता जरा’ इस वाक्य में अव्ययपद कौन सा है?)

उत्तर: ‘वनेऽत्र संस्थस्य समागता जरा’ अस्मिन् वाक्ये ‘अत्र’ अव्ययपदं अस्ति?


प्रश्नः 7. मजूषातः अव्ययपदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत-

कश्चन, दूरे, नीचे, यदा, तदा, परन्तु, यदि, तर्हि, तंत्र, परम्, च, सहसा

एकस्मिन् वने ………………… व्याधः जालं विस्तीर्य ………………… स्थितः। क्रमशः आकाशात् सपरिवारः कपोतराजः ………………… आगच्छत्। ………………… कपोताः तण्डुलान् अपश्यन् ………………… तेषां लोभो जातः। परं राजा सहमतः नासीत्। तस्य युक्तिः आसीत् । वने कोऽपि मनुष्य नास्ति। कुतः तण्डुलानाम् सम्भवः। राज्ञः उपदेशम् अस्वीकृत्य कपोताः तण्डुलान् खादितुं प्रवृत्ताः जाले ………………… निपतिताः। अतः उक्तम् ………………… विदधीत न क्रियाम् ।

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