भारतीय सिनेमा और टेलीविजन जगत के लिए 4 अगस्त 2026 का दिन बेहद दुखद रहा। बीआर चोपड़ा की ‘महाभारत’ में अश्वत्थामा और आमिर खान की फिल्म ‘गजनी’ के खतरनाक विलेन के रूप में घर-घर में पहचान बनाने वाले वरिष्ठ अभिनेता प्रदीप रावत का 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लंबे समय से ब्लड कैंसर से जूझ रहे अभिनेता ने मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में अंतिम सांस ली।
करीब चार दशकों तक फैले अपने शानदार फिल्मी सफर में प्रदीप रावत ने हिंदी ही नहीं, बल्कि तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, बंगाली और भोजपुरी फिल्मों में भी दमदार अभिनय कर अपनी अलग पहचान बनाई। 140 से अधिक फिल्मों में काम करने वाले इस कलाकार के निधन से भारतीय फिल्म उद्योग ने एक बहुमुखी अभिनेता को खो दिया है।
जबलपुर से मुंबई तक का सफर
प्रदीप रावत का जन्म 21 जनवरी 1952 को मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुआ था। अभिनय के प्रति उनका झुकाव बचपन से ही था। उन्होंने वर्ष 1984 में फिल्म ‘कानून क्या करेगा’ से बॉलीवुड में कदम रखा। हालांकि, उन्हें पहली बड़ी पहचान 1985 की फिल्म ‘मेरी जंग’ से मिली।
इसके बाद उन्होंने काश, अग्निपथ, बागी, पत्थर के फूल, कोयला जैसी कई चर्चित फिल्मों में अभिनय कर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
महाभारत में अश्वत्थामा बनकर मिली अमर पहचान
प्रदीप रावत के करियर का सबसे बड़ा मोड़ 1988 में आया, जब उन्हें बीआर चोपड़ा के ऐतिहासिक धारावाहिक ‘महाभारत’ में अश्वत्थामा का किरदार निभाने का अवसर मिला।
उनकी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और गंभीर अभिनय ने इस किरदार को दर्शकों के बीच हमेशा के लिए यादगार बना दिया। आज भी लाखों लोग उन्हें सबसे पहले अश्वत्थामा के रूप में ही याद करते हैं।
आमिर खान के साथ तीन यादगार फिल्में
प्रदीप रावत और आमिर खान ने साथ में तीन ऐसी फिल्में कीं, जिन्हें आज भी दर्शक पसंद करते हैं।
सरफरोश (1999)
इस फिल्म में प्रदीप रावत ने सुल्तान का प्रभावशाली किरदार निभाया था। उनके अभिनय से आमिर खान इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने रात में ही उन्हें फोन कर बधाई दी। शुरुआत में परिवार को लगा कि कोई मजाक कर रहा है, लेकिन बाद में जब लेखक उमाशंकर पाठक ने पुष्टि की, तब उन्हें यकीन हुआ कि फोन वास्तव में आमिर खान का था।
लगान (2001)
‘लगान’ में प्रदीप रावत ने देवा सिंह सोढ़ी का किरदार निभाया, जो एक पूर्व सैनिक और क्रिकेट टीम का अहम सदस्य होता है। यह भूमिका पहले अभिनेता मुकेश ऋषि को ऑफर हुई थी, लेकिन व्यस्तता के कारण उन्होंने फिल्म नहीं की। इस फिल्म ने साबित किया कि प्रदीप रावत केवल विलेन ही नहीं, बल्कि एक बेहतरीन चरित्र अभिनेता भी थे।
गजनी (2008)
फिल्म ‘गजनी’ में उन्होंने मुख्य खलनायक गजनी धर्मात्मा का किरदार निभाया। यह वही किरदार था, जिसने फिल्म की कहानी को नई दिशा दी।
दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने तमिल फिल्म ‘गजनी’ (2005) में भी यही भूमिका निभाई थी। आमिर खान ने उनके निधन पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि “प्रदीप रावत के बिना गजनी की कल्पना भी नहीं की जा सकती।”
सलमान खान के साथ कई फिल्मों में किया काम
प्रदीप रावत ने सलमान खान के साथ भी कई फिल्मों में अभिनय किया। इनमें बागी, पत्थर के फूल और संगदिल सनम जैसी फिल्में शामिल हैं।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सलमान खान ने बताया था कि निर्देशक ए.आर. मुरुगदास के साथ काम करने से पहले प्रदीप रावत ने मजाक में उनसे कहा था कि निर्देशक काफी अनुशासित हैं और उनके साथ काम करना आसान नहीं होगा। इस किस्से को सलमान ने बेहद मजेदार अंदाज में साझा किया था।
दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी बनाई अलग पहचान
हिंदी फिल्मों में सफलता के बाद प्रदीप रावत ने दक्षिण भारतीय सिनेमा का रुख किया।
तेलुगु फिल्म ‘सई (Sye)’ में उनके अभिनय को खूब सराहा गया और इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड (तेलुगु) से सम्मानित किया गया।
इसके बाद उन्होंने छत्रपति, स्टालिन, 1-नेनोक्कडिने, नेनु सैलजा, चाइना टाउन, हीरो 420 और क्रैक फाइटर जैसी कई फिल्मों में अभिनय किया।
उनकी अंतिम हिंदी फिल्म ‘छावा’ (2025) थी, जबकि अंतिम तेलुगु फिल्म ‘गायपद्द सिंहम’ (2026) रही।
निजी जीवन
प्रदीप रावत की निजी जिंदगी भी कई उतार-चढ़ाव से भरी रही।
उनकी पहली शादी ज्यादा समय तक नहीं चल सकी और कुछ महीनों बाद दोनों अलग हो गए। बाद में उनकी मुलाकात कल्याणी रावत से हुई। दोनों ने कई वर्षों तक एक-दूसरे को समझने के बाद 2006 में विवाह किया।
इस दंपति का एक बेटा विक्रमादित्य रावत है। परिवार हमेशा लाइमलाइट से दूर रहा और निजी जीवन को सार्वजनिक नहीं किया।
कैंसर से लंबी लड़ाई
प्रदीप रावत पिछले कुछ वर्षों से ब्लड कैंसर से जूझ रहे थे। बताया जाता है कि उन्होंने पहले इस बीमारी को मात दे दी थी, लेकिन कुछ समय पहले कैंसर दोबारा लौट आया।
पिछले एक महीने से उनका इलाज मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में चल रहा था। इलाज के दौरान उनकी प्लेटलेट्स लगातार गिरती गईं और आखिरकार 4 अगस्त 2026 की शाम उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
अंतिम विदाई
5 अगस्त 2026 को मुंबई में पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए गोरेगांव स्थित उनके आवास पर रखा गया, जहां परिवार, मित्रों और फिल्म जगत के कई कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
अंतिम संस्कार के दौरान उनके बेटे विक्रमादित्य रावत बेहद भावुक दिखाई दिए। अभिनेता रजा मुराद, यशपाल शर्मा, सोनू सूद सहित कई कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। आमिर खान ने भी उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।
भारतीय सिनेमा में हमेशा जिंदा रहेगी उनकी विरासत
प्रदीप रावत उन कलाकारों में शामिल थे जिन्होंने हर भूमिका को पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाया।
चाहे महाभारत के अश्वत्थामा हों, गजनी का निर्दयी विलेन, लगान के देवा सिंह सोढ़ी या फिर दर्जनों अन्य यादगार किरदार—हर भूमिका में उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी।
140 से अधिक फिल्मों और चार दशक से लंबे करियर के जरिए उन्होंने भारतीय सिनेमा को अनगिनत यादगार पल दिए। एक शानदार अभिनेता, दमदार खलनायक और बेहतरीन चरित्र कलाकार के रूप में उनकी विरासत हमेशा दर्शकों के दिलों में जीवित रहेगी।
प्रदीप रावत को भावभीनी श्रद्धांजलि। ॐ शांति।